what is fussy eating

खाने में नखरे दिखाने वाले बच्चों के बारे में सभी ज़रूरी जानकारी अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अगर आपका छोटा बच्चा खाने में हमेशा नखरे दिखाता है तो इससे उसमे सेहतमंद विकास के लिए ज़रूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। अगर आप इस बात को लेकर परेशान हैं कि उसकी इन आदतों से कैसे निपटा जाए, तो इसके लिए यहाँ कुछ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल दिए गए हैं, जो आपकी सारी दुविधा खत्म कर देंगे।

सवाल. मेरी 4 साल की बेटी को खाने में सिर्फ लेमन राइस पसंद है और इसके अलावा वह कुछ और खाने की कोशिश भी नहीं करती है। मुझे क्या करना चाहिए?

लगता है आपकी बच्ची खाने पीने में बहुत नखरे दिखाती है, लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। छोटे बच्चे अक्सर खाने के मामले में ऐसा करते हैं। इस उम्र के बच्चों में यह बहुत ही आम बात है कि आज वो कोई चीज़ अच्छे से खा रहे हैं और अगले ही दिन वही चीज़ खाने से मना कर सकते हैं। आप देखेंगे कि बच्चों को जो चीज़ खाना बिल्कुल पसंद नहीं, वही चीज़ वे अपने दोस्तों या पड़ोसियों के घर बड़े मज़े से खा रहे हैं। खाने में नखरे दिखाना बच्चों के वृद्धि और विकास का ही एक हिस्सा होता है। यह बच्चों के लिए माहौल को समझने और खुद को ज़ाहिर करने का एक तरीका होता है और साथ ही आपके संयम की परीक्षा भी है। लेकिन, यह ज़्यादा चिंता की बात नहीं क्योंकि बच्चे जैसे जैसे बड़े होते हैं, उनकी यह आदत कम होने लगती है और वे अलग-अलग खाद्य पदार्थों को मज़े से खाने लगते हैं।

अगर बच्चे किसी खाद्य पदार्थ को पसंद या नापसंद करते हैं, तो इसके पीछे कोई खास कारण होता है। यह खाने का आकार, बनावट, स्वाद यहाँ तक कि रंग भी हो सकता है जो कि एक संकेत है। इस बात को समझने की कोशिश करें कि क्यों आपके बच्चे को सिर्फ लेमन राइस पसंद है। इसके तीखे स्वाद की वजह से, नरम चावलों की वजह से या इसके चमकीले पीले रंग की वजह से या आप लेमन राइस में जो मूंगफली डालते हैं, उसकी वजह से भी यह आपकी बेटी के पसंदीदा हो सकते है। अगर इनमें से कोई कारण है तो कोशिश करें अपनी बच्ची को उसके पसंदीदा खाद्य पदार्थ से मिलती जुलती चीज़े खाने के लिए प्रोत्साहित करें। जैसे अगर उसे लेमन राइस पसंद है तो आप उसे आम या इमली के चावल खाने को कहें, अगर उसे मूंगफली बहुत पसंद है तो आप उसके लिए शाकाहारी पुलाव में मूंगफली डाल सकते हैं।

ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है कि पुलाव में क्या डाल सकते हैं और क्या नहीं। अगर उसे चावल पसंद है तो चावलों और सब्ज़ियोंको मिलाकर कटलेट बनाने की कोशिश करें। अगर इनमें से कोई तरकीब काम नहीं आ रही, तो कोशिश करें कि बच्चे को प्लेट में थोड़ी मात्रा में ही लेमन राइस दें और प्रोत्साहित करें कि पहले प्लेट की बाकी चीज़ों को जैसे कि सब्ज़ियों आदि को खाने के बाद लेमन राइस खाए। हाँ, इस काम में आपको लंबा वक्त लगेगा, जिसके लिए आपको संयम रखने व बच्ची को बढ़ावा देने की ज़रूरत है लेकिन आपकी दृढ़ कोशिशों से जल्दी ही आपकी बच्ची लेमन राइस के अलावा बहुत सी पौष्टिक चीज़ें भी खाएगी।

सवाल. अगर मेरे बच्चे को खाने में कोई एक खाद्य पदार्थ पसंद नहीं है तो वह पूरा खाना ही छोड़ देती है। क्या यह सही है?

हममें से बहुत से लोग इसका सामना करते और यहाँ तक की बड़े होने के बाद भी। अगर हमें कोई एक चीज़ पसंद नहीं है तो हम पूरा खाना ही छोड़ देते हैं। हालांकि सिर्फ एक डिश की वजह से पूरा खाना ही छोड़ देना सेहत के लिए अच्छा नहीं है। यहाँ कुछ ऐसे तरीके बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बच्ची को वो खाद्य पदार्थ भी खिला सकते हैं जो उसे पसंद नहीं हैं।

  1. यह जानने की कोशिश करें कि आपकी बेटी सारा खाना क्यों नहीं खाना चाहती है।
  2. यह सोचने की कोशिश करें कि क्या कभी पहले बच्ची को ज़बरदस्ती यह खाद्य पदार्थ खिलाया गया हो या न खाने पर उसे सजा दी गई हो। बच्चों के कोई चीज़ खाने से मना करने पर उन्हें सज़ा देने से उन पर गलत असर पड़ता है। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो अब आपको इसके लिए सही कदम उठाने होंगे।
  3. बच्चों को उनकी नापसंद की चीज़े खिलाने का एक अच्छा तरीका यह भी है कि इन्हें बनाने में बच्चों की मदद लेनी चाहिए, जिससे उन्हें वो चीजें खाने में बढ़ावा मिलता है। उन्हें अपने हाथ का बनाया खाने में बहुत गर्व महसूस होता है, चाहे उन्हें वह खाद्य पदार्थ पसंद हो या न हो।
  4. खाना बनाने के दौरान, आप भी समझ पाएंगे कि बच्चों को यह चीज़ क्यों पसंद नहीं है। जैसे हो सकता है तुरई का पतलापन या गोभी की गंध बच्चे को पसंद न हो। आप चाहें तो तुरई को दाल के साथ बना सकते हैं या गोभी में कुछ और मसाला डाल कर उसकी महक को बदल सकते हैं।
  5. तैयारी के हर स्टेप में बच्चे को भी हाथ आजमाने के लिए बढ़ावा दें और उन्हें बताएँ कि खाने का जो पहलू उन्हें पसंद नहीं, उसे कैसे बदला गया है।

सवाल. क्या मेरे बच्चे को खाना खत्म करने के लिए मीठे का लालच देना सही है?

नहीं, यह सही नहीं है। चॉकलेट और आइसक्रीम जैसी मीठी चीज़ों का इस्तेमाल करना और बच्चे को खाना खाने के लिए लालच देना एक दो बार काम कर सकता है। वह अपने खाने को इसलिए जल्दी से खा सकता है ताकि उसे ट्रीट मिले। लेकिन, आगे चल कर यह बच्चे की आदत बन जाएगी कि वह सेहतमंद खाने से ज़्यादा ट्रीट में दिलचस्पी लेगा। इससे बच्चे को यह संदेश मिलेगा कि सेहतमंद खाना बोरिंग होता है और वह हर बार खाने के लिए आपसे ट्रीट की उम्मीद करेगा। अगर बच्चा ज़िद्दी है और हर बार यही रास्ता अपनाता है, तो धीरे-धीरे वह खाना शुरू करने से पहले ही ट्रीट की उम्मीद करने लगेगा। इसलिए, खाना खत्म करने के लिए बच्चे को मीठे का लालच देना एक अच्छा सुझाव नहीं है।

सवाल. मैं अपने 4 साल के बच्चे को उस वक़्त खाना खिलाती हूँ जब वह मेरे मोबाइल में कार्टून देख रहा होता है। वह जल्दी से खाना खा लेता है और मेरा काम हो जाता है। लेकिन मेरे पति मुझसे इस बारे में बहस करते हैं। मैं क्या करूँ?

आजकल बच्चों को घर के बाहर पक्षियों को दिखाते हुए या टीवी दिखाते हुए खाना खिलाना बहुत आम बात हो गई है। यह बच्चों को खाना खिलाने का बहुत ही आसान तरीका है खासकर तब, जब घर मे ढेर सारा काम होता है। लेकिन, इसका बच्चे के खान-पान की स्वस्थ आदतों के विकास पर बुरा असर पड़ता है। दुर्भाग्यवश, इस बार आपके पति सही कह रहे हैं और बच्चों को खाना खिलाते वक़्त स्क्रीन पर रोक लगनी चाहिए। बच्चे को टीवी देखते वक़्त खाना नहीं खिलाना चाहिए क्योंकि:

  1. खाना खाते वक़्त जिन बच्चों का ध्यान कहीं और रहता है उन्हें इतना तक नहीं पता चल पाता कि वे क्या खा रहे हैं और उन्होंने कितना खाया है।
  2. टेलीविज़न या किसी और स्क्रीन के सामने बैठ कर खाने से लापरवाही से खाने की आदत पड़ जाती है।
  3. जिन बच्चों को इस तरह से खाना खिलाया जाता है वो अपने खाने की मात्रा को नियंत्रित नहीं कर पाते और मोटापे के शिकार हो जाते हैं, जो बड़े होने पर भी जारी रहता है।
  4. उन्हें ये भी अहसास नहीं हो पाता कि कब पेट भर गया और पेट भरने के संकेतों को अनदेखा करते रहते हैं क्योंकि उनका ध्यान खाने की बजाय कार्टून पर होता है। इसकी वजह से उन बच्चों में खुद को काबू करने की आदत विकसित नहीं हो पाती, खासकर तब, जब वे जंक फूड खाना शुरू करते हैं।

आप नीचे बताए गए सुझावों को अपना कर बच्चों को खान-पान में ज़्यादा सचेत बना सकते हैं:

  1. न सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि घर में सबके लिए ऐसा माहौल बनाएँ जिससे बिना इधर - उधर ध्यान भटके खाना खाने की आदत पड़े।
  2. बच्चों को इस बात के लिए प्रेरित करें कि वे अपने हाथों से खाने को महसूस करें, ध्यान से चबा चबा कर खाएँ और अलग-अलग स्वाद की पहचान करें।
  3. जल्दी ही, आप अपने बच्चे के साथ अनुमान लगाने जैसा खेल खेलना शुरू कर सकते हैं जैसे करी में क्या क्या है, कौन सी सब्ज़ियाँ या कौन से मसाले आदि डाले गए हैं।
  4. बच्चे को पेट भरने के संकेतों के बारे में सचेत करें जैसे 2 रोटी खाने के बाद उसका पेट भर गया। उससे पूछें कि क्या वह और खा सकता है या इतना बहुत है।

खाना खाने के दौरान टीवी या कार्टून देखने से बच्चों पर और भी कई तरह से असर पड़ता है। कार्टून के दौरान बीच - बीच में जो विज्ञापन (खासकर जंक फूड के) दिखाए जाते हैं, ये बच्चों के खाद्य पदार्थों को चुनने की आदतें भी बिगाड़ देते हैं। ये विज्ञापन इतने लुभावने होते हैं कि वह सामने रखे खाने के बजाय उस चीज़ को खाना चाहेगा जो टीवी पर दिखाई जा रही है। तो, अगर आप एक ऐसा बच्चा चाहते हैं जो खाने में ज़्यादा नखरे न करें और जिसकी खान-पान की आदतें भी सेहतमंद हो, तो आज से ही खाने के दौरान मोबाइल देखने पर रोक लगाएँ।

सवाल. मैं खाने के समय बहुत तनाव में आ जाती हूँ। मेरा 2.5 साल का बच्चा खाने में बहुत नखरे करता है, इसलिए मुझे उसे ज़बरदस्ती खाना खिलाना पड़ता है और फिर परिवार के सब लोग मुझ पर चिल्लाने लगते हैं। मैं क्या करूँ?

बच्चे को ज़बरदस्ती खाना खिलाना सही नहीं है क्योंकि इससे बच्चे के दिमाग में खाने को लेकर एक गलत सोच बन जाती है। इससे बच्चा खाने को नेगेटिव तरीके से देखने लगता है, उसके मन में खाने को लेकर चिढ़ बैठ सकती है। अगर बच्चा कोई चीज़ खाने से मना कर देता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह उस चीज़ से नफरत करता है। हो सकता है वह सिर्फ यह देख रहा हो कि आप उसकी आज़ादी पर कैसे प्रतिक्रिया करते हैं। इन हालातों से निपटने के लिए यहाँ कुछ तरीके बताए गए हैं:

  1. जब भी ऐसा हो, शांत रहने की कोशिश करें और प्रतिक्रिया न दें। सबसे ज़रूरी बात यह है कि बच्चे को ज़बरदस्ती न खिलाएं।
  2. अपने परिवार के सदस्यों से बात करें और उन्हें आराम से समझाने की कोशिश करें कि खाने के दौरान दखलंदाज़ी न करें और इसे आपको खुद ही संभालने दें।
  3. खाने के दौरान खुशनुमा माहौल बनाएँ। खाना खिलाते वक़्त तनाव में ना रहें क्योंकि बच्चे बहुत सहज होते हैं और खाने के दौरान जो तनाव आप महसूस करते है, उसे बच्चे भी महसूस करते हैं। जब वे तनाव में रहने लगते हैं तो फिर सारी स्थिति हाथ से निकल जाती है।
  4. बच्चे को खाना खिलाने से पहले इस बात पर ध्यान दें कि वह बहुत ज़्यादा भूखा न हो। खाने में नखरे दिखाने वाले बच्चे को भूखे पेट खाना खिलाना मुसीबत को न्यौता देना है।
  5. आपका बच्चा अभी भी छोटा और बढ़ती उम्र का है, इसलिए आप उसे जो भी खिलाएं वह उसकी उम्र के हिसाब से बिल्कुल सही होना चाहिए, जिससे कि उसके लिए खाना आसान हो जाता है।
  6. ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें, जो बच्चों के ऊपरी तालु से चिपक जाते हैं, जो बहुत कुरकुरे होते हैं या जिनके गले में फंसने का खतरा रहता है जैसे कि सख्त ब्रेड स्टिक या चिक्की आदि। बच्चे को ऐसा नरम खाना दें जो वह अपने आप खा सके।
  7. पराठों को कटर की मदद से पेड़, किसी जानवर, स्टार, जहाज आदि के आकार में काटें जिससे कि बच्चे उन्हें खेल-खेल में खा सकें।
  8. अगर बच्चे को दाल खाना पसंद नहीं तो आप दाल भर कर परांठा बनाने की कोशिश करें या उसे रोटी के आटे में गूंधें या दाल के कटलेट बनाएँ।
  9. खाने की टेबल ऐसी होनी चाहिए जहां आप दोनों बैठ सकें और बातें करें व बच्चे को खाना खिलाते वक़्त मज़ेदार कहानियां सुनाएँ।
  10. बच्चे को नए-नए खाद्य पदार्थ खिलाने की कोशिश करें ताकि उसे पता चले कि यह सही और स्वादिष्ट है। खाने के बारे में खुशनुमा यादें बनाएँ ताकि बच्चे को वे हमेशा याद रहें और वह खुले दिमाग से नए-नए खाद्य पदार्थ खाने की कोशिश करे।

सबसे ज़रूरी बात जो आपको ध्यान रखनी है वह यह कि अगर आपका बच्चा दिखने में सेहतमंद है, हर तरफ दौड़ता और भागता है और उसमें कुछ नया सीखने की ललक है, तो इसका मतलब वह सही से खा रहा है। हालांकि, अगर बच्चा बहुत कम तरह के खाद्य पदार्थ खाता है और लंबे समय तक वह ज़्यादातर खाद्य पदार्थों से दूर रहता है तो आपको किसी डॉक्टर से उसकी जांच करवानी चाहिए।