अपने बच्चे की पोषण संबंधी कमियों को किस तरह दूर करें

अपने बच्चे की पोषण संबंधी कमियों को किस तरह दूर करें

क्या आप इस बात से परेशान हैं कि आपका बच्चा अपनी पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है? क्या आप यह जानना चाहती हैं कि आपके बच्चे की इन पोषण संबंधी कमियों को किस तरह से दूर किया जा सकता है? चलिए अब आपको इन कमियों और उनसे निपटने के तरीकों के बारे में जानकारी देते हैं।

बच्चों में पोषण संबंधी कमियों से निपटना कितना ज़रूरी है

जब बच्चा बड़ा हो रहा होता है तब शुरूआती कुछ सालों के दौरान उसकी सेहत पर पोषण से संबंधित कमियों का बहुत ही ज़्यादा असर पड़ता है। रिसर्च के मुताबिक, 80% से ज़्यादा भारतीय कैल्शियम, विटामिन ए, बी12, फोलेट के अलावा लाइसिन, आयरन, ज़िंक, और विटामिन बी6 की कमी के रिस्क से पीड़ित होते हैं। ये सारी कमियाँ अनाज से भरपूर डाइट और ढंग का खाना नहीं खाने का नतीजा है। ज़रूरी विटामिन और मिनरल का सेवन न करने के कारण ही माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी होती है, और ये सब बच्चों की ग्रोथ और विकास के लिए ज़रूरी होते हैं। प्रेगनेंसी के दौरान और बचपन के शुरुआती वर्षों में इस तरह की कमियों के कारण मृत्यु दर, बीमारी, शारीरिक और मानसिक विकृति में बढ़ोतरी जैसे कई, काफ़ी गंभीर नतीजे भुगतने पड़ सकते हैं।

बच्चों में माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी को किस तरह दूर करना चाहिए

इंसान की अच्छी सेहत के लिए ज़रूरी विटामिन और मिनरल में आयरन, ज़िंक, कैल्शियम, विटामिन ए, बी6, बी12, और फोलेट शामिल होते हैं। बच्चों में इन माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी और उन्हें कैसे दूर जाए, इसके बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए आगे पढ़ें।

आयरन की कमी

  • एनीमिया के अलावा, आयरन की कमी आपके बच्चे में सामाजिक-भावनात्मक व्यवहार जैसे कि तनाव, चिंता आदि के मुद्दे, साइकोमोटर स्किल (मानसिक गतिविधियों से संबंधित जिसमें आँखों और हाथों के कॉम्बिनेशन का इस्तेमाल होता है जैसे कि टाइपिंग करना, बॉल को निशाने पर फेंकना, कार चलाना आदि) और कॉग्निशन (मानसिक रूप से किसी चीज़ को समझना, एहसास) जैसी चीज़ों पर उल्टा असर डालती है जिसे हम आगे कभी सुधार नहीं पाते और बाद में ध्यान लगाने में कमी (पढ़ाई में, चीज़ों को समझने में) जैसी परेशानियां भी पैदा हो जाती हैं।
  • ऐसी चीज़ें खाना जिसके कारण आयरन के अवशोषण (कोशिकाओं द्वारा ब्लड से आयरन, ज़िंक, आदि लेना) में कमी और आयरन की कमी जिसमें हाई फाइटेट्स (अनाज-फलियां, जड़ें-कंद, मक्का, सेम, गेहूं का आटा और जवार), डाइट में कम विटामिन सी लेना (फल और सब्जियां), ज़्यादा दुध का इस्तेमाल, रोज़ चाय/कॉफी पीना, आयरन सप्लीमेंट और मांसाहारी खाना (मीट, मछली और मुर्गी) का कम इस्तेमाल आदि शामिल होते हैं।
  • शिशु को 6 महीने की उम्र के बाद बच्चों वाला आयरन से भरपूर खाना खिलाना चाहिए। चाय और इस तरह के दूसरे बेवरेज का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।
  • विटामिन C से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर में आयरन के अब्ज़ॉर्प्शन को बढ़ाने में मदद करते हैं। 6 महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को आयरन फोर्टिफाइड खाना और सप्लीमेंट्स दिए जाने चाहिए।
  • यह सलाह दी जाती है कि जहां कुपोषण, एनीमिया, उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और मधुमेह (डायबिटीज़) से पीड़ित माताओं से बच्चों को स्तनपान करवाते वक्त कम आयरन के ट्रांसफर का खतरा हो, खासतौर पर उन बच्चों को जो 4 महीने से स्तनपान कर रहें हो, तो अपने डॉक्टर के सुझाव से आयरन सप्लीमेंट लेना शुरु कर देने चाहिए।

ज़िंक की कमी

  • शरीर में ज़िंक की कमी से विकास का रुकना, हाइपोगोनैडिज्म (गोनाड्स का कम टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन पैदा करना), त्वचा के घाव, सूंघने में परेशानी और स्वाद को समझने में परेशानी, इसके अलावा इन्फेक्शन के लिए प्रतिरोध का बिगड़ना, जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। ज़िंक की कमी ज़िंक युक्त खाद्य पदार्थों के कम सेवन, इनहिबिटर्स (फाइटेट्स) के ज़्यादा सेवन और ज़्यादा दस्त के कारण भी होती है।
  • ज़िंक से भरपूर खाद्य पदार्थों में दूध, अंडे, अनाज, फलियां, नट्स और बीज शामिल हैं। इसके अलावा ज़िंक की कमी को काबु/खत्म करने के लिए ज़िंक फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ भी ज़रूरी होते हैं। ज़िंक सप्लीमेंट निमोनिया और दस्त से काफ़ी हद तक बचाव करते हैं।

आयोडीन की कमी

  • शरीर में आयरन की कमी से गोइटर, क्रेटिनिज्म (आयरन की कमी से हार्मोन का निर्माण धीमा पड़ जाता है, इससे उनके शारीरिक, मानसिक और जननांगों का ठीक से विकास नहीं हो पाता। इस बीमारी को क्रेटिनिज्म कहते हैं), हाइपोथायरायडिज्म (काफ़ी मात्रा में थायराइड हार्मोन का न बनना), ब्रेन डैमेज, गर्भपात (एबॉर्शन), स्टिल बर्थ (मरे हुए बच्चे का जन्म), मानसिक मंदता (मेंटल रिटार्डेशन), साइकोमोटर दोष, सुनने व बोलने में परेशानी या न्यूरो-साइकोलॉजिकल कमी जैसी बीमारियाँ होती हैं। बच्चों में आयोडीन की कमी से उनका IQ लेवल कम हो जाता है।
  • आयोडीन सप्लीमेंटेशन का सबसे किफायती और टिकाऊ तरीका यूनिवर्सल सॉल्ट आयोडाइज़ेशन (यूएसआई है। बच्चों को नॉन -आयोडाइज़्ड नमक नहीं देना चाहिए।

विटामिन A की कमी

यह निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अंधेपन का सबसे बड़ा और खास कारण है। विटामिन A से भरपूर मांसाहारी भोजन या बीटा कैरोटीन युक्त सब्जियों और फलों का कम इस्तेमाल, विटामिन A की कमी का प्रमुख कारण होती हैं।

मक्खन, घी, दही, चीज़, अंडे, लिवर और पीले/नारंगी रंग के फल और सब्जियों में विटामिन A काफ़ी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।

विटामिन D की कमी

  • हम सभी जानते हैं कि हड्डियों के विकास और कैल्शियम-फाॅस्फोरस की होमियोस्टैसिस (आंतरिक स्थिरता) के लिए विटामिन D बहुत ज़रूरी है।
  • विटामिन D की कमी के कारण इनफैंटाइल हाइपोकैल्सीमिया (ब्लड स्ट्रीम में कैल्शियम की कमी), रिकेट्स, देर से विकास और दांत निकलने जैसी समस्या हो सकती है।
  • ज़्यादातर शिशु अपने जीवन के शुरुआती दौर में मां के दूध, सूरज की रोशनी और विटामिन डी के सप्लीमेंट पर निर्भर होते हैं।

आखिर में

माता-पिता को अपने बच्चों को माइक्रोन्यूट्रिएंट से भरपूर बैलेंस्ड डाइट देनी चाहिए। सामान्य डाइट के साथ, उन्हें बच्चों के सेहतमंद विकास के लिए ज़रूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट सप्लीमेंट्स के बारे में अपने बच्चे के डॉक्टर से बात करनी चाहिए।