अब बारिश के मौसम में अपने बच्चों को रखें स्वस्थ और सुरक्षित

भारत में, चिलचिलाती गर्मी के बाद बारिश का मौसम छोटे बच्चों के लिए पानी में खेलने और भीगने का बेहतरीन बहाना होता है। हालांकि, मानसून अपने साथ सामान्य बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण, सर्दी और फ्लू के संक्रमण के साथ-साथ अन्य रोग भी लेकर आता है। तापमान और नमी में गिरावट के कारण हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस आदि कमज़ोर इम्यूनिटी पर हमला करते हैं। साल के इस मौसम के दौरान मेटाबोलिज़्म भी धीमा हो जाता है। इसलिए, अगर आप चाहते हैं कि आपके बच्चे बीमार पड़े बिना बारिश में मज़े कर सकें तो इस मौसम में उनके खान-पान पर विशेष ध्यान दें।

बारिश में ध्यान देने वाली ज़रूरी बातें

ठंड से बचने के लिए:  तापमान में अचानक आने वाली गिरावट के कारण बढ़ी ठंड से बचाने के लिए आप अपने बच्चे को हल्के जैकेट या रेनकोट पहना सकते हैं।  बच्चों को गरम सूप और पेय पदार्थ भी दें। सूप, स्टू, शोरबा, दूध और हर्बल ड्रिंक जैसी गरम चीज़ें पीने से बहुत राहत मिल सकती है और बच्चों में पानी की कमी भी नहीं होगी। अपने बच्चे को हमेशा गुनगुना और फ़िल्टर वाला पानी ही पिलाएं। इससे संक्रमण और पानी से होने वाली बीमारियों का खतरा कम होगा। अलग-अलग रेसिपी बनाएं और विभिन्न खाद्य समूहों के खाद्य पदार्थों को शामिल करें ताकि बच्चे को ज़रूरी पोषण मिल सके। बच्चों को ताज़ा खाना पकाकर खिलाएं और पहले का बचा खाना खिलाने से परहेज करें। हानिकारक सूक्ष्म जीव-जंतुओं को बारिश में पनपने से रोकने के लिए आप खाने को भाप में, उबाल कर, बेक करके या प्रेशर कुकर में पका सकते हैं। बारिश में तली-भुनी चीज़ें खाने का मन तो बहुत करता है लेकिन बच्चों को ऐसी चीज़ें कम से कम ही खिलाएं।

1. ताज़ा खाएं : ताज़ा सामग्री खरीदना और उनका तुरंत उपयोग करना बहुत फ़ायदेमंद होगा। याद रखें, भोजन जितना ताज़ा होगा, आपके बच्चे को पोषण भी उतना ही ज़्यादा मिलेगा। जैसे-जैसे सामग्री पुरानी होती जाती है, उनमें पोषक तत्वों की मात्रा और गुण लगातार खत्म होते जाते हैं। यहां तक कि खाना बनाने से बहुत देर पहले ही सब्ज़ी काटकर रख लेने से भी पोषक तत्वों का नुकसान होता है। चूंकि मानसून के दौरान प्रतिरक्षा और मेटाबोलिज़्म कम होता है, इसलिए संक्रमणों का मुकाबला करने के लिए बेहतरीन पोषक तत्वों की कमी पूरी की जानी चाहिए। इसके अलावा, बाहर खाने से बचना चाहिए क्योंकि आप नहीं जानते कि रेस्तरां ताज़ा भोजन का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं।

2. मसाले खाएं: भारत में कई मसाले वर्षों से प्रचलित है इसलिए खाने में अलग-अलग प्रकार के मसाले डालें। आपकी रसोई में उपलब्ध हर मसाला पोषक तत्वों से भरपूर है और उनमें से कई शरीर की गर्मी को भी बढ़ा सकते हैं। हल्दी, लौंग, काली मिर्च आदि सर्दी, गले में खराश और खांसी से राहत के लिए फ़ायदेमंद हैं। खाने में हर्ब्स शामिल करना भी बहुत ज़रूरी है। उदाहरण के लिए, तुलसी के पत्ते इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। अदरक और लहसुन में जीवाणु रोधी और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो बारिश में होने वाली सामान्य बीमारियों  के खतरे को कम कर सकते हैं। इन मसालों की सबसे खास बात यह है कि इन्हें किसी भी दिलकश डिश में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

3. मौसमी पदार्थ खाएं: हर मौसम के लिए प्रकृति में हमें वही फल और सब्ज़ियां मिलती हैं जिनकी हमें ज़रूरत होती है। मौसमी फल और सब्ज़ियां उन पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं जो उस मौसम के लिए ज़रूरी हैं। मानसून के मौसम के लिए भी ये बात सही है। इसलिए, कोशिश करें और अपने बच्चे के आहार में स्थानीय रूप से उपलब्ध और मौसमी खाद्य पदार्थों को शामिल करें। जामुन, अनार, लीची, सेब और आड़ू जैसे फल इस मौसम में उपलब्ध होते हैं और विटामिन और खनिजों से भरे होते हैं। अगर आप अपने बच्चे के लिए स्नैक तैयार कर रहे हैं तो सूखे मेवे, बीज और नट्स भी स्वस्थ विकल्प हैं। ये आसानी से उपलब्ध हैं, स्टोर करने आसान हैं, और दिलकश या मीठे व्यंज़नों में भी डाले जा सकते हैं।

4. स्वच्छता को दें प्राथमिकता : माता-पिता के तौर पर मानसून के दौरान अपने बच्चों को स्वच्छ आदतें सिखाना ज़रूरी है। सभी बर्तनों और खाद्य पदार्थों को अच्छी तरह से धोने के अलावा सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा स्कूल या खेल से वापस आने के बाद अपने हाथों और पैरों को धोता है। कपड़े धोते समय एंटीमाइक्रोबियल तरल का उपयोग करने के अलावा गर्म पानी से नहाना भी ज़रूरी है। अगर आपके बच्चे को सर्दी है, तो उसे छींकते या खांसते समय अपना मुंह और नाक ढकना सिखाएं। उसे लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहने दें। सुनिश्चित करें कि वे इस मौसम में माइक्रोबियल संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए ढके हुए जूते पहनते हों। तो अब बारिश के मौसम में अपने बच्चे के साथ मस्ती करने के लिए आपको मिल चुके हैं ज़रूरी सुझाव। सेहतमंद भोजन और स्वच्छ आदतें आपके बच्चे को संक्रमण और बीमारी से बचाने के साथ-साथ उसे ऊर्जा भी देंगे।

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