सेहतमंद गर्भावस्था से जुड़ी सारी ज़रूरी बातें जो आपको पता होनी चाहिए

गर्भावस्था के लिए खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार करने के लिए आपको इस दौरान होने वाले बदलावों के बारे में ज़रूर पता होना चाहिए। हॉर्मोनल बदलाव से आपके पूरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा, आपकी पोषण संबंधी ज़रूरतें बहुत ज़्यादा बढ़ जाएंगी, और पूरे 9 महीनों तक आपका वज़न भी बढ़ता रहेगा। अगर आपको गर्भावस्था के बारे में पूरी जानकारी होगी तभी आपके लिए यह अहम सफर बेहद खूबसूरत बन सकेगा जहाँ आप आराम से अपना और अपने होने वाले शिशु का पूरा ख़्याल रख सकेंगी। इसके अलावा, गर्भावस्था के बारे में जानकारी रखने और ज़रूरी सुझाव अपनाने से शिशु के जन्म के लिए आपके शरीर में पर्याप्त ऊर्जा और ताक़त भी रहेगी। गर्भावस्था की सही तैयारी करने से शिशु के जन्म के बाद आप स्तनपान के लिए भी खुद को बेहतर ढंग से तैयार कर सकेंगी और धीरे धीरे आप पहले की ही तरह वज़न पा लेंगी।

गर्भावस्था के दौरान होने वाले 6 सबसे ज़रूरी शारीरिक बदलाव

  1. कब्ज़ : पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाने के लिए, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम में भोजन और तरल पदार्थों की गति धीमी हो जाती है,जिसके कारण गर्भवती महिलाओं में गंभीर कब्ज़ की शिकायत होती है। । यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप गर्भावस्था के किस ट्राइमेस्टर में हैं। आमतौर पर, यह गर्भावस्था के आखिरी 4-5 महीनों में होता है। कब्ज़ से राहत के लिए सही आहार, शारीरिक गतिविधि और आराम बहुत ज़रूरी हैं।
  2. एसिड रिफ़्ल्क्स और सीने में जलन : अन्न की नली से खाना वापिस आ जाने से एसिड रिफलक्स और सीने में जलन होने लगती है। अन्न नली का काम होता है खाने को पेट और नली की ओर वापस आने से रोकना। हालांकि गर्भावस्था के दौरान जब शिशु का विकास होता है तो वे माँ के पेट में हिलने डुलने पर ऊपर की ओर धक्का मारते हैं और इस वजह से गर्भवती महिलाओं को एसिड रिफलक्स की समस्या होती है। यह समस्या आमतौर पर खाना खाने के बाद महसूस होती है। खाना पेट में मौजूद एसिड में मिल जाता है और खाने की नली में वापिस आ जाता है और ऐसे में सीने में जलन होने लगती है।
  3. जी मिचलाना और उल्टी आना : यूं तो यह समस्या गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में दिखती है जिसे मॉर्निंग सिकनेस भी कहा जाता है। यह दिन में कभी भी हो सकती है। यह गर्भावस्था के पहले, पांचवे और छठे हफ्ते में शुरू होती है और आमतौर पर 14वें से 16वें हफ्ते तक रहती है। मॉर्निंग सिकनेस के लक्षणों को कम करने के लिए सुबह नाश्ते के साथ कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे बिस्कुट या टोस्ट खाना चाहिए।
  4. वज़न बढ़ना : गर्भावस्था के दौरान वज़न बढ़ने का कारण एस्ट्रोजन के उच्च स्तर से जुड़ा होता है। इस बात की संभावना बहुत ज़्यादा होती है कि गर्भावस्था के आखिरी महीनों में गर्भवती महिलाओं का वज़न तेजी से बढ़ेगा। हालांकि, याद रखें कि आपके बढ़े हुए वज़न में ज़्यादातर हिस्सा तरल पदार्थ का है, और फैट या मांसपेशियों का नहीं है।
  5. एडिमा: एडिमा एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर में तरल पदार्थ को बाहर निकालने की क्षमता कम हो जाती है, इसके कारण पैरों और टखनों में सूजन आ जाती है। यूटरस के बढ़े हुए और गुरुत्वाकर्षण बल के कारण शरीर के ऊपरी हिस्से से खून बाकी हिस्सों में पहुँचने की गति कम हो जाती है। और शरीर के विभिन्न हिस्सों में पानी भर जाता है जिसे एडिमा कहते हैं।

गर्भावस्था के दौरान बढ़े वज़न को ऐसे करें कम

गर्भावस्था के दौरान शरीर का वज़न विभिन्न कारणों से बढ़ता है, जैसे:

1. भ्रूण के विकास के कारण

शरीर में अतिरिक्त पानी के कारण वज़न बढ़ना। शरीर में अतिरिक्त पानी की ज़रूरत होती है ताकि शिशु सही ढंग से गतिविधि कर सके, और प्लेसेन्टा और एम्निओटिक तरल पदार्थ बनाने के लिए पानी ज़रूरी है। (एक ऐसा तरल जो गर्भ को सुरक्षित रखता है। यह आमतौर पर तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान होता है।

वज़न सही रखने के लिए आपको नियमित व्यायाम करना चाहिए और संतुलित आहार खाना चाहिए। इस दौरान प्रोटीन और फाइबर से भरपूर आहार खाएं, जिसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा थोड़ी हो और फैट बहुत कम।

गर्भावस्था के दौरान होर्मोन में होने वाले बदलाव

गर्भावस्था के दौरान नीचे बताए गए होर्मोन बहुत तेज़ी से निकलते हैं:

  1. एल्डोस्टेरोन ऐसा होर्मोन है जो एड्रीनल ग्लैंड द्वारा जारी किया जाता है और यह नमक का स्तर सही रखने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर के स्तर के कारण एल्डोस्टेरोन अधिक निकलता है।
  2. ग्रोथ हार्मोन पिट्यूटरी ग्लैंड द्वारा जारी होता है। यह भ्रूण के विकास और पोषण की बढ़ती ज़रूरतों के लिए होता है।
  3. थायरोक्सिन होर्मोन थायरॉयड ग्लैंड द्वारा जारी होता है और शरीर के मेटाबोलिज़्म को सही रखने के लिए ज़रूरी होता है। मेटाबोलिज़्म से जुड़े तनाव के कारण, थायरोक्सिन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
  4. पैराथोर्मोन पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा जारी होता है और कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम को पचाने में मदद करता है।

गर्भावस्था के दौरान डाइट

गर्भावस्था के पहले और इसके दौरान पर्याप्त और संतुलित पोषण आपके लिए लंबे समय तक फ़ायदेमंद साबित हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं का स्वास्थ्य बहुत जटिल रहता है और यह विभिन्न आनुवंशिक, आर्थिक, और सामाजिक कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान आपको संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाना बहुत ज़रूरी है।

गर्भावस्था के दौरान यूं बनाएँ संतुलित आहार

  1. अनाज और दलिया: फ़ाइबर और फ़ोलिक एसिड से भरपूर अनाज खाना गर्भावस्था में बहुत फ़ायदेमंद होता है। उदाहरण के लिए राजमा, व्हीट फ्लेक्स, रागी फ्लेक्स, ओट्स और दालें आदि गर्भावस्था के दौरान फ़ायदेमंद हैं
  2. मेवे और बीज: सूखे मेवे में फैट, ओमेगा 3 फैटी एसिड, ओमेगा6 फैटी एसिड, विटामिन की भरपूर मात्रा होती है जो आपके शिशु के उचित विकास के लिए बहुत ज़रूरी है।
  3. पोल्ट्री और मछली: ये माँसाहारी खाद्य पदार्थ अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन से भरपूर होते हैं और भ्रूण के सही विकास के लिए यह खाना बहुत फ़ायदेमंद है। यह मैटरनल टिशू को भी मजबूत बनाते हैं। इसके बेहतरीन विकल्प हैं रवास, अही, बांगड़ा जैसी मछलियां और चिकन।

स्वस्थ गर्भावस्था के लिए अन्य खाद्य पदार्थ

खाद्य पदार्थ

 फ़ायदे

1.दूध, दही, खोया, पनीर जैसे डेरी उत्पाद

1. प्रोटीन, कैल्शियम, और विटामिन डी की कमी पूरी होगी और मांसपेशियों में दर्द से राहत मिलेगी

2. फल

2. ये स्वादिष्ट होते हैं और विभिन्न पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर होते हैं

3. ऑमलेट, उबले अंडे, लिवर करी

3. इनमें अच्छी गुणवत्ता वाले प्रोटीन और आयरन होते हैं

4. पोहा, उपमा, चावल

4. यह आयरन के अच्छे स्रोत हैं और ये आसानी से पचते हैं

5. हरा चना, दाल, ब्रेड, पुडिंग, गाजर

5. ये पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ होते हैं और गर्भावस्था के दौरान आपकी पोषण संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ज़रूरी होते हैं

6. मौसंबी, नींबू और कीवी

6. ये मॉर्निंग सिकनेस से राहत दिला सकते हैं

गर्भावस्था के दौरान वज़न नियंत्रित ऐसे करें

  1. 4-5 लीटर पानी पिएं
  2. हफ्ते में 5 दिन व्यायाम करें। गर्भावस्था के दौरान योग करना बहुत फ़ायदेमंद एक्सरसाइज है।
  3. 7-8 घंटे सोएं
  4. फ़ाइबर, फ़ोलिक एसिड, विटामिन ए और आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएँ
  5. दिन भर में उल्टी और पेट की समस्याओं से निपटने के लिए थोड़ी थोड़ी देर पर कम मात्रा में खाना खाएँ। इससे वज़न नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

तो अब आप एक सेहतमन्द और सकारात्मक तरीक़े से गर्भावस्था के सफ़र का मज़ा के सकती हैं। अपने लिए कोई भी आहार या मील प्लान बनाने से पहले डॉक्टर या न्यूट्रीशनिस्ट से ज़रूर बात करें। साथ ही गर्भावस्था के दौरान एक्सरसाइज और सप्लीमेंट से जुड़े सवाल भी अपने डॉक्टर से ही पूछें क्योंकि वे आपके शरीर के हिसाब से बेहतर सलाह दे सकेंगे।