Role of Iron in Your Baby’s Development

शिशु के विकास के लिए आयरन ही है सबसे ज़्यादा ज़रूरी, जानें क्यों?

जब बात आती है शिशु के पोषण, वृद्धि और विकास की, तो हर माँ बाप अपने बच्चों को सबसे अच्छा आहार और सुविधाएँ देते हैं। 6 महीने की उम्र के बाद से ही शिशु के आहार में सभी ज़रूरी पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ होने ही चाहिए। इन्हीं आवश्यक पोषक तत्वों में आयरन भी है और अन्य पोषक तत्वों की तरह आयरन भी आपके बच्चे के शरीर में विभिन्न कार्यों में मदद करता है। ध्यान और उर्जा के स्तर को बढ़ाने के साथ साथ आयरन इम्युनिटी भी बढ़ाता है और पाचन भी बेहतर बनाता है। बड़ों के साथ साथ बच्चों के लिए भी आयरन बेहद फ़ायदेमंद है। इसलिए, माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके बच्चों को प्राकृतिक खाद्य स्रोतों से पर्याप्त आयरन मिले, खासकर 6 महीने की उम्र के बाद। आर्टिकल पूरा पढ़ें और जानें कि कौन से कारक शिशु के शरीर में आयरन के स्तर को प्रभावित करते हैं और आयरन से आपके बच्चे के शारीरिक विकास पर क्या असर पड़ता है।

वृद्धि एवं विकास में आयरन की भूमिका

आयरन केवल शरीर की कोशिकाओं का विकास ही नहीं करता है बल्कि लाल रक्त कोशिकाओं से पूरे शरीर में खून पहुंचाने में भी मदद करता है। यह पोषक तत्व आपके शिशु के दिमाग़ी विकास और वृद्धि में भी फ़ायदेमंद होता है। सबसे बड़ी बात, आयरन से आपके शिशु की इम्युनिटी भी मज़बूत होती है।

  • दिमागी विकास: गर्भावस्था के पाँचवे सप्ताह में शिशु का मस्तिष्क विकसित होना शुरू हो जाता है। तो, मस्तिष्क को सामान्य रूप से विकसित करने के लिए, पर्याप्त पोषण की ज़रूरत होती है। जैसा कि पहले भी बताया गया है आयरन सबसे ज़रूरी पोषक तत्वों में से एक है जो मस्तिष्क के विकास में मदद करता है। मानव मस्तिष्क में ऐसे ज़रूरी हिस्से होते हैं जो स्मृति, सीखने और मानसिक कार्यों से जुड़े हैं। ये हिस्से आमतौर पर गर्भावस्था के आख़िरी तीन महीनों में विकसित होते हैं और 2-3 साल की उम्र तक पूरी तरह से विकसित हो जाते हैं। इसलिए, छोटे बच्चों को आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खाना बहुत ज़रूरी है।
    • आयरन कई मस्तिष्क प्रक्रियाओं में मदद करता है जो ध्यान, प्रेरणा, स्मृति और मोटर नियंत्रण को प्रभावित करते हैं। यह हिप्पोकैम्पस के विकास के लिए भी ज़रूरी है, वह हिस्सा जो समझने, सीखने और याद रखने में मदद करता है।
    • आप छह महीने की उम्र से ही अपने बच्चे को आयरन से भरपूर आहार देना शुरू कर सकते हैं। आयरन से भरपूर कुछ अच्छे खाद्य पदार्थ हैं सेब, हरी पत्तेदार सब्ज़ियां जैसे पालक, बीन्स, आयरन फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ और साबुत अनाज की ब्रेड।
    • ध्यान दें कि अगर आपके बच्चे के आहार में पर्याप्त मात्रा में आयरन नहीं है, तो उसे चीजों को सीखने, समझने और याद रखने में परेशानी हो सकती है।
  • मज़बूत इम्युनिटी: किसी भी बीमारी या संक्रमण से बचने के लिए मज़बूत इम्युनिटी की ज़रूरत होती है। तो अगर आपका बच्चा अक्सर बीमार पड़ता है तो इसका मतलब है कि उसकी इम्युनिटी बहुत कमज़ोर है और उसके शरीर में आयरन की कमी को पूरा करना चाहिए।
    • जन्म के बाद शिशु की इम्युनिटी धीरे धीरे बेहतर होती है और बाहरी वातावरण के लिए तैयार हो जाती है। इसलिए जिस बच्चे की इम्युनिटी कमज़ोर है उसे संक्रमण और बीमारी आदि का ख़तरा ज़्यादा रहता है।
    • शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए विभिन्न पोषक तत्व ज़रूरी होते हैं जैसे आयरन, ज़िंक, विटामिन सी, और विटामिन डी। संतरा, पपीता, नींबू का रस, अंडे की ज़र्दी, मछली आदि जैसे खाद्य पदार्थों को पोषक तत्वों का मुख्य स्रोत माना जाता है।
    •  
    • शरीर की इम्युनिटी को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए एन्ज़ाइम की बहुत ज़्यादा ज़रूरत होती है और आयरन भी इन एन्ज़ाइम के निर्माण में ज़रूरी भूमिका निभाता है। इसलिए बच्चों के लिए आयरन से भरपूर आहार खाना बहुत ज़्यादा ज़रूरी होता है।

इन कारणों से आयरन के स्तर पर प्रभाव पड़ता है:

बच्चों के शरीर में आयरन के स्तर को प्रभावित करने के लिए बहुत सारे कारण होते हैं:

  • मुख्य रूप से, गर्भावस्था के दौरान एक महिला के शरीर में आयरन का स्तर बच्चे के शरीर में आयरन के स्तर को बहुत प्रभावित करता है। अगर गर्भावस्था के दौरान माताएं आयरन की कमी या एनीमिया से पीड़ित हैं, तो इस बात की अधिक संभावना है कि आपको शिशुओं में आयरन की कमी से होने वाली बीमारी, एनीमिया, का ख़तरा बहुत ज़्यादा बढ़ जाएगा।
  • बच्चे के जन्म का समय भी शरीर में आयरन के स्तर को प्रभावित करता है। समय से पहले पैदा होने वाले बच्चे, या जो गर्भावस्था के 37 सप्ताह से पहले पैदा हुए हैं, उनमें आयरन की कमी और एनीमिया का खतरा ज़्यादा हो सकता है।
  • 6 महीने की उम्र के बाद अगर आप शिशु को पर्याप्त पूरक आहार नहीं खिलाएँगे तो उसके शरीर में आयरन की कमी हो सकती है। इसलिए 6 महीने की उम्र के बाद आप अपने शिशु के आहार में आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें और स्तनपान करना भी जारी रखें क्योंकि ब्रेस्टमिल्क से ही बच्चे की आयरन और अन्य पोषक तत्वों की ज़रूरत को पूरा करना काफी नहीं होता है।
  • शिशुओं के संपूर्ण स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए स्वच्छता एक बहुत ज़रूरी कारक है। बच्चों में आयरन की कमी के लिए हुकवर्म और व्हिपवर्म (एक प्रकार के कीटाणु) ज़िम्मेदार होते हैं जिनसे आंतों में संक्रमण होता है। अगर आपका घर या बच्चे के आसपास का वातावरण साफ़ सुथरा नहीं है तो इससे उसके शरीर में संक्रमण हो सकता है। इस संक्रमण के कारण आपके बच्चों के शरीर में आयरन सही ढंग से घुल नहीं पायेगा। 

अब तो आपको पता चल चुका है कि आयरन आपके बच्चे के बेहतर विकास और वृद्धि के लिए बहुत ज़रूरी होता है। तो आपको इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप 6 महीने की उम्र के बाद बच्चों को ज़्यादा से ज़्यादा आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ खिलाएँ।