बच्चों में खाने की एलर्जी पता करने और उससे निपटने के तरीके

बच्चों में खाने की एलर्जी पता करने और उससे निपटने के तरीके

बच्चे को खाना खिलाने से बहुत ख़ुशी मिलती है। लेकिन अपने बच्चे को नए तरह का खाना खिलाने से पहले, अलग-अलग तरह के खाने की चीज़ों से होने वाली एलर्जी के बारे में जान लेना आपके लिए बेहतर होगा। अगर आप अलग-अलग तरह के खाने की चीज़ों से बच्चों में होने वाली एलर्जी के बारे में जानना चाहतीं हैं तो आगे पढ़ें।

बच्चों में खाने से होने वाली एलर्जी को समझें

बच्चों में खाने से होने वाली एलर्जी बहुत आम है। हम सबको ही एलर्जी से निपटने का तरीका सीखना पड़ता है। और हमें ये निरंतर याद रखना होगा कि कोई भी एलर्जिक प्रतिक्रिया हमारे शरीर के रोग प्रतिरोधक प्रणाली की प्रतिक्रिया होती है, और असहिष्णुता (इन्टोलेरेंस) के जैसी नहीं होती है जिनसे निपटना आसान होता है। खाने की जो चीज़ें बच्चे के शरीर के लिए बचपन से ही नुकसानदायक होती हैं, उसके खिलाफ उनके शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली तुरन्त ही प्रतिक्रिया देती है। ये एलर्जिक प्रतिक्रिया एलर्जी वाली चीज़ों को खाने, सूँघने या छूने से भी तुरंत शुरू हो जाती है।

बच्चे को खाने की चीज़ों से हुई एलर्जी के लक्षण खुजली होने से लेकर चकत्ते पड़ना, उल्टियाँ आना, पेट दर्द, साँस न आना, अस्थमा इत्यादि होते हैं। अगर इन लक्षणों का इलाज सही समय से न किया जाए तो ये लक्षण जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। बड़े होने पर हम इन लक्षणों से निपटना सीख जाते हैं पर बचपन में इन लक्षणों को पहचानने और इनके इलाज करने के तरीकों को समझने में काफी मेहनत लगती है। क्योंकि ये एलर्जी हमारे शरीर की ही प्रतिक्रिया होती है, इसलिए इसे जड़ से खत्म कर पाना मुमकिन नहीं होता। केवल इसके लक्षणों का इलाज किया जा सकता है और इन चीज़ों के संपर्क में आने से बचा जा सकता है।

अगर हम एक एलर्जी अटैक की प्रक्रिया के सारे चरण देखें तो वो कुछ ऐसे दिखेंगे:

स्टेप 1: कोई व्यक्ति किसी एलर्जिक खाने की चीज़ के सम्पर्क में आता है। खाने की एलर्जी होना सबसे ज़्यादा आम बात है।

स्टेप 2: शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली ने उस एलर्जिक चीज़ को नुकसानदायक चीज़ के रूप में पहचाना। अब शरीर जल्द से जल्द इस चीज़ से दूर होना चाहेगा।

स्टेप 3: शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली हिस्टामाइन हॉर्मोन बनाएगी। ये एक तरह के प्रोटीन होते हैं जो दिमाग को सन्देश भेजने के लिए खून में घूमते रहते हैं। ये शरीर की उस एलर्जिक चीज़ को दूर रखने की एक कोशिश है।

स्टेप 4: हिस्टामाइन शरीर में कुछ लक्षण एक प्रतिक्रिया के रूप में बनाते हैं। जिन अभिव्यक्तियों के बारे में हमने बात की, उनके अलावा भी शरीर के कई अंग ऐसे हैं जिनमें ये प्रतिक्रिया दिखाई दे सकती है।

खास चीज़ें जिनसे एलर्जी हो सकती है, उनसे प्रभावित जनसंख्या के हिसाब से, वर्गीकरण किया जा सकता है। इस सूची में मुख्यतः प्रोटीन से भरपूर खाने की चीज़ें शामिल हैं जैसे कि अंडे, दूध, नट्स, गेहूं, सोया और मछली।

लेकिन आमतौर पर, खाने की किसी भी चीज़ से एलर्जी हो सकती है। खाने के कुछ मिनटों या घंटों बाद भी शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया शुरू हो सकती है। कभी-कभार ऐसी खाने की चीज़ों से एलर्जी हो जाती है जो कि स्तनपान कराने वाली माँ के खाने का हिस्सा होतें हैं। ये एलर्जिक चीज़ें बच्चे के शरीर में माँ के दूध के रास्ते पहुँच जाती हैं जिससे बच्चे के शरीर में एलर्जिक प्रतिक्रिया शुरू हो जाती है। ऐसे में लक्षणों को समझने में और जानने में काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है क्योंकि तब, माँ ने कब क्या खाया, इस बात का ध्यान रखना पड़ता है। हालांकि, माँ को तब तक किसी तरह का परहेज बरतने की ज़रूरत नहीं पड़ती जब तक बच्चे में ऐसे कोई लक्षण दिखाई ना दें।

बच्चों में खाने की चीज़ों से होने वाली एलर्जी का कैसे पता करें?

क्योंकि खाने की इन एलर्जी से आगे चलकर भी समस्याएं बढ़ सकती हैं इसलिए बच्चे के साथ सावधानी बरतने की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है। बहुत ज़्यादा परख भी बच्चे के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

  • ऐसे एलर्जिस्ट के पास जाएँ जो एलर्जी की सभी मुमकिन वजहों और प्रतिक्रियाओं को पहचान सके। इन वजहों का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट करने पड़ सकते हैं।
  • छोटे बच्चों के लिए सबसे बेहतर विकल्प त्वचा का परीक्षण होता है। बच्चों की त्वचा बहुत सारी तरल चीज़ों के संपर्क में आती है जिनमें एलर्जी वाली चीज़ें मिली हो सकती हैं। त्वचा का थोड़ा सा सैंपल निकाला जाता है और उसके लक्षणों को स्टडी किया जाता है।
  • खून की जाँच करके भी कुछ खाने की चीज़ों के बारे में पता किया जा सकता है। खून को अलग अलग चीज़ों के सम्पर्क में लाकर खून के सैंपल की इम्मयुनोग्लोब्युलिन ई के लिए जाँच की जाती है जिससे हिस्टामिन के बनने और एलर्जिक प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी मिलती है।
  • अगर इन जांचों में से किसी से भी कोई ढंग का परिणाम नहीं मिलता है तो एक फ़ूड चैलेंज टेस्ट किया जाता है। ये एक दिलचस्प टेस्ट है जहाँ जिन भी खाने की चीज़ों पर शक होता है उन्हें पकवानों में छिपाकर बच्चे को थोड़ा-थोड़ा खिलाकर शारीरिक प्रतिक्रिया जाँची जाती है। ये किसी चिकित्सक के निरीक्षण में किया जाता है और इसको करने से पहले सभी मुमकिन लक्षणों का इलाज करने के लिए ज़रूरी तैयारी करके रखी जाती है।

इसलिए खाने की एलर्जी के लक्षणों का सिर्फ़ इलाज किया जा सकता है, उसको जड़ से खत्म करने का कोई तरीका नहीं है। एलर्जी को दूर करने का सबसे पहला इलाज है एलर्जी वाली चीज़ों से दूर रहना। ऐसा करने के लिए काफ़ी परहेज करना होगा, खासकर बच्चों के मामले में। अगर आप ये चंद नुस्खे समझ लें तो ये आपके लिए बहुत मददगार होंगे:

  • सब्जी-मंडी से सब्जियां या सामान लेने से पहले खाने पर लगे सभी लेबल्स को ज़रूर पढ़ें। आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का दौर चल रहा है। ऐसे में, आप ध्यान रखें कि आप अपने कार्ट में क्या रख रही हैं! आपको पहले ही अपना होमवर्क करना पड़ेगा, ये समझना पड़ेगा कि किस खाने के सामान में क्या पड़ा है और ऐसे ही चुनाव करना होगा।
  • एलर्जी वाले सामानों को अलग रखें। उनको अपने फ़्रिज में खाने के दूसरे सामानों के साथ ना रखें।
  • एलर्जी वाली खाने की चीज़ों को अलग बर्तनों में पकाएँ।
  • कुछ एलर्जी वाली चीज़ें सिर्फ़ खाने पर ही एलर्जी दिखाती हैं लेकिन कुछ चीज़ों को सिर्फ़ देखकर या सूँघकर भी आपके बच्चे को समस्या हो सकती है, इसलिए उसे अलग से खाने को दें।
  • पहले से बताकर रखें; चाहे वो स्कूल के टीचर हों, डे-केयर के केयर-टेकर हों, रेस्टॉरेंट में खाना बनाने वाले हों या फ्लाइट में खाना खिलाने वाले हों, उन्हें अपने बच्चे की एलर्जी के बारे में अच्छे से बताकर रखें। बच्चे के एलर्जिस्ट उसके लक्षणों को कम करने के लिए दवा भी दे सकते हैं। बच्चे के आसपास रहने वाले हर इंसान को इन दवाओं और ज़रूरी एहतियात के बारे में जागरूक करें।
  • कुछ स्कूलों में बच्चों के आराम के लिए एलर्जी ग्रुप्स और खास बैठने की व्यवस्था भी की जाती है। अगर आपका बच्चा स्कूल जाने लगा है तो आपको इस बारे में पूछताछ करनी चाहिए।

एलर्जी वाली चीज़ों को पहचानने और उन्हें अपने बच्चे की दिनचर्या में से निकालने के लिए आपको काफ़ी मेहनत करनी होगी। लेकिन याद रखें कि इन एलर्जी से निपटने के लिए आपको पेशेवर एलर्जिस्ट की मदद लेनी होगी. ध्यान रखें कि बच्चे को एलर्जी से निपटने में समय लगेगा इसलिए सब्र काम लें.