Encouraging self-feeding in toddlers

बच्चों को अपने आप खाना सिखाने के आसान तरीके

भारत में माता-पिता, खासतौर पर माताएँ बच्चों को खुद नहीं खाने देती बल्कि अपने हाथों से खाना खिलाती हैं। इसके अलावा माताएँ जब तक हो सके, तब तक बच्चों को स्तनपान करवाने की कोशिश करती हैं। इसमें कोई शक नहीं कि स्तनपान एक शिशु के सेहतमंद तरीके से बढ़ने के लिए सबसे अच्छा विकल्प है, इसके साथ ही अपने बच्चे से जुड़ने, और माँ का प्यार जताने का एक बहुत अच्छा तरीका है। हालांकि, जब बच्चे बड़े होने लगते हैं, तो उन्हें खुद खाना सिखाना भी बहुत ज़रूरी है ताकि वे आत्म-निर्भर बन सकें। यह उन्हें भविष्य के लिए तैयार करता है और सही खाना चुनने के लिए बढ़ावा देता है। अगर आपका बच्चा अपने हाथों से खाना खाने से मना कर देता है, तो ऐसे समय मे समझदारी से काम लेना चाहिए और उनकी मदद करने के लिए कुछ आसान तरीके अपनाने चाहिए।

भारत मे आहार-संबंधी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जब बच्चा 6 महीने का हो जाता है तो माँ अपने दूध के साथ साथ ऊपर का खाना देना भी शुरू कर सकती है। हालांकि, स्तनपान 2 साल की उम्र तक जारी रखा जा सकता है। लेकिन, बच्चों के डॉक्टर के मुताबिक, जितनी जल्दी बच्चों को ठोस खाना देना शुरू कर दिया जाए, उनकी वृद्धि एवं विकास के लिए उतना ही अच्छा है।

बच्चों को अपने आप खाना खाने के लिए बढ़ावा देना कितना जरूरी है

हमारे देश में बच्चों को अपने आप खाना खाने के लिए बहुत कम बढ़ावा दिया जाता है। ज़्यादातर माताओं को यही चिंता रहती है कि अगर वे बच्चों को अपने आप खाना खाने के लिए छोड़ देंगी तो बच्चे पेट भर कर खाना नहीं खाएंगे। भारत मे अभी भी संयुक्त परिवार का चलन है, जहां घर मे दादा-दादी और दूसरे सदस्य मौजूद रहते हैं, वहाँ बच्चों को अपने आप खाना सिखाने की ज़रूरत नहीं समझी जाती है ।

अपने आप खाना खाने के फ़ायदे इस बात से कई ज़्यादा है कि बच्चा जो भी खाना खाता है, उससे ज़रूरी पोषण मिलता है। जब बच्चा आराम से बैठने लगता है और अपने आस-पास की चीजों को पकड़ने लगता है, तो बिल्कुल सही समय है कि अब आप बच्चे को थोड़ा-थोड़ा ऐसा खाना दें जो हाथ मे पकड़ कर खा सकें। बच्चे बहुत जिज्ञासु होते हैं और हर चीज़ को अपने मुँह में डालने की कोशिश करते हैं। आप इस मौके का फायदा उठा सकते हैं और उन्हें कुछ चुनिंदा चीज़े जैसे कि केला, नरम पनीर के टुकड़े उठा कर खुद अपने मुँह में डालने दे सकते हैं। हाँ, आपको उनकी हर हरकत पर कड़ी नजर तो रखनी होगी लेकिन साथ ही उन्हें अपने आप खाने के लिए बढ़ावा भी देना होगा।

छूना, उठाना, चम्मच का इस्तेमाल करना और कटोरे या प्लेट को पकड़ना कुछ ऐसे बेसिक मोटर स्किल हैं जो बच्चा अपने आप खाना खाने से सीखता है। इससे बच्चों के सेंसरी स्किल (संवेदी कौशल) भी विकसित होने लगते हैं, क्योंकि बच्चा अपने आप से अलग-अलग खाद्य पदार्थों का स्वाद, बनावट, खुशबू और रंगों का पता लगाने लगता है। धीरे-धीरे बच्चा खाने में बारे में सीखेगा, जैसे कितना खाना है और कब उसका पेट भर गया है।

बच्चों को अपने आप खाने के लिए बढ़ावा देने से होने वाले कुछ महत्वपूर्ण फ़ायदे:

  • बच्चे जल्दी से चीज़ो की पहचान करना और उन्हें पकड़ना सीखेंगे।

  • बच्चे के हाथ और आँखों के तालमेल में सुधार होगा।

  • बच्चे के सेंसरी स्किल (जैसे छूना, सूंघना, स्वाद आदि) अच्छे होंगे।

  • बच्चे जल्दी ही आत्म-निर्भर हो जाएंगे।

  • बच्चे अपने मुँह और हाथों को अच्छे से इस्तेमाल करना सीखेंगे।

बच्चों को अपने आप खाना सिखाना

बच्चों को अपने हाथों से चीज़े उठाकर और अपनी उंगलियों का इस्तेमाल कर के खाना सिखाना बहुत अच्छी बात है। बच्चे 2-3 महीने की उम्र से ही चीज़ो को उठा कर अपने मुँह में डालना शुरू कर देते हैं। वे बड़ी आसानी से फलों के टुकड़े, ब्रेड, नरम पनीर और बिस्किट उठा सकते हैं। उन्हें ऐसा करने दे और रंग-बिरंगे विकल्प दे कर इस चीज़ को और मज़ेदार बनाएँ।

अगले स्टेप में बच्चों को छोटा सा चम्मच देना है जो पकड़ने में बिल्कुल हल्का होना चाहिए। शुरुआत में चम्मच पकड़ना और उससे खाना थोड़ा मुश्किल लग सकता है लेकिन आपको संयम रखना होगा। बच्चे जल्दी सीखते हैं और वे खुद इस काम में माहिर हो जाएंगे। समय के साथ उन्हें अपने आप खाना अच्छा लगने लगेगा।

इन तरीकों का भी पालन करें:

  1. बच्चों को अभ्यास करने दें: अभ्यास करने से धीरे-धीरे सब सही हो जाता है। बच्चे चाहे हाथों से खाना खाएं या बर्तन से, उन्हें अपने आप खाने का अभ्यास करने दें। अगर बच्चे अपने हाथों से खाने से मना कर देते हैं, तो उन्हें उनके पसंदीदा तरीके से खाना खिलाना चाहिए। लेकिन बाद में, दोबारा कोशिश करें।

  2. बढ़ावा देना: बच्चे जो पहला काम करते हैं, वह यह कि अपने हाथों का इस्तेमाल करके चीज़े मुँह में डालते हैं। इसीलिए बच्चे के सामने खाने के छोटे-छोटे टुकड़े रखे (जैसा पहले बताया गया है) और उन्हें अपने नन्हें कोमल हाथों से खाना उठाने दें।

  3. बर्तनों में खाना खाने के लिए बढ़ावा दें: बच्चों को बढ़ावा देने के लिए आप भी वैसे ही बर्तनों का इस्तेमाल करके बच्चों के साथ खाना खा सकते हैं। बच्चे हमेशा आपकी नकल करने की कोशिश करेगें। अपने छोटे बच्चों की मदद करनी चाहिए और दिखाना चाहिए कि खाना खाने के लिए चम्मच और हाथों का इस्तेमाल किस तरह किया जाता है।

  4. बच्चों के खाना खाते वक्त उन पर नज़र रखें: बच्चा जब अपने आप खाना सीखता है तो वह नए-नए रंगों और बनावटों को भी खोजता है। इसलिए बच्चा जब खाना खाता है तो उसके आस-पास ही रहकर देखना चाहिए कि बच्चा कैसे खाता है और कितना खाना मुँह में डालता है।

  5. ध्यान रखें खाना गले में न फंसे: इस बात पर नज़र रखें कि बच्चा कितना खाना मुँह में डाल रहा है। गले मे खाना फंसना बहुत सामान्य बात है, क्योंकि बच्चे ज़रूरत से ज़्यादा खाना मुँह में भर लेते हैं। लेकिन यह खतरनाक हो सकता है। बच्चे को सांस लेने में मुश्किल महसूस हो सकती है, क्योंकि खाना श्वासनली में फंस जाता है। ऐसा तब हो सकता है जब बच्चा ज़्यादा खाना मुँह में भर लेता है और सारा खाना एक साथ निगलने की कोशिश करता है। इसीलिए बच्चों को हमेशा छोटे टुकड़े देने चाहिए और पका हुआ केला, पपीता, यहाँ तक कि नरम ब्रेड के भी छोटे छोटे टुकड़े देने चाहिए जिन्हें वे आसानी से निगल सकते हैं।

बच्चे को अपने आप खाना सिखाने के लिए ऊपर बताए गए तरीके अपनाने के अलावा आपको बच्चों के साथ बैठकर खाने का अभ्यास करना चाहिए, बच्चे खुद से खाते वक़्त गंदगी फैलाते हैं, इसीलिए इस बात के लिए तैयार रहना चाहिए और संयम से काम लेना चाहिए। अपने आप खाना सीखने में समय लगता है इसलिए बच्चों को आराम से अपना समय ले कर सीखने दें।