Decoding Symbols on the Packaged Food

पैकेज्ड फ़ूड पर छपे हुए चिन्हों को कैसे समझें

आप जब भी कोई पैकेज्ड फ़ूड प्रॉडक्ट खरीदते हैं, तो उसमें कई तरह के चिन्ह छपे होते हैं जिन्हें समझने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है। लेकिन ऐसी चीज़ों को बनाने वालों और खाद्य नियामक संस्थाओं के लिए इस तरह के चिन्ह काफी मददगार साबित होते हैं। ऐसे चिन्हों के ज़रिए पैकेज्ड फ़ूड के बारे में ज़रूरी जानकारी को ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है ताकि वे उस चीज़ को खरीदने में समझदारी वाला फैसला ले सकें।

कभी-कभी पैकेज्ड फ़ूड प्रॉडक्ट (खास तौर पर इम्पोर्टेड प्रॉडक्ट) पर उसमें मिलाई गई सामग्री और उसे इस्तेमाल करने से जुड़ी जानकारी भी छपी होती है, जिन्हें ग्राहकों तक पहुंचाना ज़रूरी होता है।

चलिए कुछ खास फ़ूड लेबल और उनके मतलब के बारे में बेहतर तरीके से जानकारी लेते हैं:

  • एगमार्क- भारत सरकार लगभग 205 अलग-अलग वस्तुओं जैसे कि दालें, अनाज, एसेंशियल ऑयल, वनस्पति तेल, फल, सब्जियों और सेमी प्रोसेस्ड प्रॉडक्ट आदि के लिए यह लेबल जारी करती है। जो निर्माता अपना सामान एगमार्क के तहत चिन्हित करवाना चाहते हैं उन्हें एगमार्क प्रयोगशाला से प्रमाण पत्र लेना होता है।
  • शाकाहारी और मांसाहारी चिन्ह- खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग और लेबलिंग) विनियम, 2011, के मुताबिक ‘मांसाहारी’ खाद्य पदार्थ के हर पैकेज पर भूरे रंग की आउटलाइन वाले स्क्वायर के अंदर भूरे रंग का सर्कल होता है और स्क्वायर की भुजाएं सर्कल के व्यास से दोगुनी होती है।

जिन प्रॉडक्ट में सिर्फ अंडे हों, तो निर्माता उनके बारे में अतिरिक्त जानकारी भी दे सकते हैं।

शाकाहारी खाद्य पदार्थ के हर पैकेज पर हरे रंग की आउटलाइन वाले स्क्वायर के अंदर हरे रंग का सर्कल होता है और स्क्वायर की भुजाएं सर्कल के व्यास से दोगुनी होती है। इन चिन्हों को विपरीत बैकग्राउंड वाले पैकेज पर, प्रॉडक्ट के ब्रांड नेम के पास, और लेबल, कंटेनर, पैम्पलेट, लीफलेट व किसी भी विज्ञापन मीडिया पर दर्शाया जा सकता है।

  • एफएसएसएआई मार्क- इस चिन्ह का मतलब है कि यह खाद्य पदार्थ हाइजेनिक है व खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (एफएसएस) 2006 के तहत खाद्य पदार्थों के लिए तय किए गए सुरक्षा मानकों को पूरा करता है। एफएसएसएआई खाद्य पदार्थों के निर्माताओं और संचालकों को 14 अंकों का लाइसेंस नंबर भी जारी करती है, जिसे एफएसएसएआई के लोगो के साथ पैकेज पर दर्शाना होता है।
  • फ़ूड प्रॉडक्ट ऑर्डर (एफपीओ) मार्क - इसे भारत सरकार द्वारा जैम, पैक्ड फ्रूट, अचार आदि जैसे प्रोसेस्ड फ़ूड के लिए जारी किया जाता है।
  • इंडिया ऑर्गेनिक मार्क - यह चिन्ह उन खाद्य पदार्थों के लिए जारी किया जाता है, जिनकी खेती ऑर्गेनिक तरीके से की जाती है।

आजकल इम्पोर्टेड खाद्य पदार्थों का काफ़ी चलन है, इसलिए आपको कुछ अंतर्राष्ट्रीय चिन्हों के बारे में भी पता होना चाहिए। यहाँ पर इस बारे में कुछ जानकारी दी जा रही है:

  • जीडीए - इसे गाइडलाइन डेली अमाउंट के तौर पर भी जाना जाता है। जीडीए खाद्य पदार्थों में मौजूद शुगर, फैट, सोडियम और कैलोरी की मात्रा के बारे में बताता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो, अगर आप सेहतमंद संतुलित डाइट फॉलो करना चाहते हैं तो आपको जीडीए में बताई गई मात्रा से ज़्यादा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि एक स्वस्थ महिला को पुरुष की तुलना में कम कैलोरी की ज़रुरत पड़ती है, खाद्य पदार्थों के लेबल पर महिलाओं की ज़रुरत के मुताबिक ही जीडीए दर्शाया जाता है। बच्चों के लिए भी अलग जीडीए होता है। एक वयस्क को रोज़ाना 2000 कैलोरी, 70 ग्राम फैट, 90 ग्राम शुगर, 20 ग्राम सैचुरेटेड फैट और 2400 मिली ग्राम सोडियम की ज़रुरत पड़ती है। 5 से लेकर 10 तक के बच्चों को रोज़ाना 1800 कैलोरी, 85 ग्राम शुगर, 70 ग्राम फैट, 20 ग्राम सैचुरेटेड फैट और 1400 मिली ग्राम सोडियम की ज़रुरत पड़ती है।

तो, अब जब आप अगली बार शाॅपिंग करने सुपर मार्केट का रुख करेंगे, तब आपको अपने परिवार के लिए सेहतमंद और पोषक तत्वों से भरपूर प्रॉडक्ट चुनने में काफी आसानी होगी।