Choosing right supplement for my toddler

छोटे बच्चों के लिए सही सप्लीमेंट कैसे चुनें

आप ने यह ज़रूर सुना होगा की "अक्सर बड़ी चीज़ें छोटे पैकेट में आती हैं"। आपके छोटे से बच्चे पर भी यह सही बैठता है, क्योंकि छोटा पेट होने के बावजूद उन्हें ज़्यादा पोषण की ज़रूरत होती है। और ऐसा इसलिए, क्योंकि छोटे बच्चे बड़े बच्चों और बड़े लोगों की तुलना में जल्दी बढ़ते हैं। कई बार, बच्चों को भरपूर पोषण वाला संतुलित खाना देने के बाद भी बहुत से माता-पिता अपने बच्चों के पोषण के लिए परेशान रहते हैं। ऐसी हालत में हमें सप्लीमेंट देने का ख्याल आता है। इस आर्टिकल से आप समझ पाएंगे कि छोटे बच्चों को सप्लीमेंट क्यों और कैसे देना चाहिए।

बच्चों को पोषक तत्वों के सप्लीमेंट की ज़रूरत क्यों है?

यह सच है कि, बच्चों के पोषण से जुड़ी लगभग सारी ज़रूरतें घर में बने ठीक से पके हुए, सेहतमंद खाने से पूरी हो सकती है। आमतौर पर मिलने वाला दूध, संतरे का जूस और दूसरे अनाज कैल्शियम, आयरन (लौह), विटामिन बी और डी आदि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स से फोर्टिफाय किए होते हैं। ये सभी चीज़ें पोषण की ज़रूरतों को पूरा करने के साथ पोषण की सामान्य कमी से भी बचाते हैं।

हालाँकि, कई बार सिर्फ खाना आपके बच्चे की सभी ज़रूरतों को पूरा नहीं कर सकता। अगर आपका बच्चा खाने में नखरे करता है, और आप उसे वो सारी चीज़ें ठीक मात्रा में नहीं खिला पाते जो उसके लिए ज़रूरी है जैसे अनाज, सब्जियां, फल, दालें, दूध से बनी चीज़ें आदि, तो उसे पूरा पोषण नहीं मिल पाता और इस वजह से उसका विकास रुक सकता है। ऐसे समय पर ही सप्लीमेंट देने की ज़रूरत होती है। अगर बच्चे में, नीचे बताई गई समस्याएं दिखाई देती हैं तो आपको बच्चे के लिए अच्छे मल्टीविटामिन की ज़रूरत होगी।

  • धीमा शारीरिक विकास
  • धीमा दिमागी विकास
  • खाने की कुछ चीज़ों से एलर्जी
  • लम्बे समय तक बीमार रहना
  • कुछ खास चीज़ें ही खाना

इसे ऐसे समझ सकते हैं कि बच्चे के अच्छे वृद्धि और विकास के लिए उसे शुद्ध शाकाहारी बनाना सही नहीं होगा। सिर्फ पेड़-पौधों से मिलने वाली चीज़ें खिलाने से आयरन (लौह), कैल्शियम, ज़िंक, विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी का खतरा रहता है। इन तत्वों की कमी को दूर करने के लिए अगर आप बच्चे को इनके सप्लीमेंट नहीं देते हैं, तो उसे किसी गंभीर खतरे का सामना करना पड़ सकता है। इस वजह से हो सकता है कि उसका विकास देरी से या असामान्य हो।

इसी तरह आँतों की सूजन (इंफ्लेमेटरी बोवेल) या सीलिएक बीमारी वाले बच्चों को विटामिन डी और दूसरे मिनरल जैसे ज़िंक और आयरन (लौह) को सोखने में परेशानी होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीमारी की वजह से उनके पाचन तंत्र का वह हिस्सा खराब हो जाता है जो इन तत्वों को सोखता है। सिस्टिक फाइब्रोसिस (एक अनुवांशिक बीमारी है, जो फेफड़े को प्रभावित करता है) एक ऐसी बीमारी होती है जिसकी वजह से बच्चे का शरीर विटामिन डी को ठीक से सोख नहीं पाता है। इस हालत में बच्चे फैट और फैट में घुलने वाले विटामिन जैसे विटामिन ए, डी, इ, और के भी सोख नहीं पाते। बच्चों के लिए यह विटामिन ज़रूरी हैं क्योंकि वे सिर्फ वृद्धि और विकास में ही सहायक नहीं होते बल्कि इनसे बीमारियों से लड़ने की ताकत भी बढ़ती है। इसलिए ऐसे मामलों में बच्चों को कुछ खास सप्लीमेंट की ज़रूरत होती है। ऐसे बच्चे जो कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं, उन्हें भी ज़्यादा पोषण की ज़रूरत होती है।

कुछ बच्चे खाने में बहुत नखरे करते हैं और इसलिए ऐसे बच्चों के शरीर में ज़िंक और आयरन (लौह) की कमी हो जाती है क्योंकि ये बच्चे वही चीज़ें खाने से मना कर देते हैं जिनमें ज़िंक और आयरन (लौह) ज़्यादा होते हैं जैसे दाल, दूध से बनी चीज़ें, नट्स, बीज, अंडे और शैलफिश आदि। इसलिए आप बच्चों को ज़िंक वाले सप्लीमेंट देने के बारे में सोच सकते हैं।

सही सप्लीमेंट और उसकी खुराक का पता लगाना

अगर आपको लगता है कि विटामिन के सप्लीमेंट से आपके बच्चे को फ़ायदा हो सकता है तो भी उसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें। डॉक्टर आपको बच्चे की ज़रूरतों के बारे में ठीक से समझा सकते हैं और यह भी बता सकते हैं कि उसे सप्लीमेंट की ज़रूरत है या नहीं और कौन सा सप्लीमेंट बेहतर होगा। आपको सप्लीमेंट की सही खुराक का भी ध्यान रखना होगा क्योंकि विटामिन की ज़्यादा खुराक भी बच्चे को नुकसान पहुंचा सकती है।

सावधानियां

याद रखिये कि, बच्चों को ज़्यादा विटामिन और मिनरल देने से उनका विकास जल्दी नहीं होगा। इसे ऐसे समझिये, अगर आपका बच्चा फैट में घुलने वाले विटामिन जैसे विटामिन ए, डी, इ और के ज़्यादा खा लेता है तो उसका शरीर इन्हें बॉडी फैट में जमा कर लेगा और ये विटामिन उसके किसी काम नहीं आएँगे। कई मामलों में ज़्यादा विटामिन डी देने से छोटे बच्चों में विटामिन डी टॉक्सिसिटी भी पायी गयी है।

विटामिन की सही खुराक पता करने के साथ-साथ किस तरह का सप्लीमेंट देना है यह भी पता करें। उदाहरण के लिए, आप अपने बच्चे को कैंडी या च्युइंगगम वाले विटामिन खिलाना न चाहें क्योंकि ऐसी चीज़ों को बच्चे ज़्यादा खा सकते हैं।

बच्चों के कैल्शियम वाले सप्लीमेंट और दूसरे सप्लीमेंट उनकी पहुँच से दूर रखें। अपनी निगरानी में ही उन्हें ये खिलाएं। अगर आपको लगता है कि आपके बच्चे ने ज़्यादा सप्लीमेंट खा लिए हैं तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

याद रखें

अगर बाज़ार में कोई सप्लीमेंट मिल रहा है, तो इसका मतलब ये नहीं है कि वह आपके बच्चे के लिए ज़रूरी है। अगर आप अपने बच्चे को संतुलित खाना सही मात्रा में देते हैं तो उसकी सारी ज़रूरतें खाना खाने से ही पूरी हो जाती हैं। बच्चों को सप्लीमेंट देना तभी ज़रूरी होता है जब उन्हें कोई ऐसी बीमारी हो जिसकी वजह से पोषण को सोखने की क्षमता कम हो जाती है या कुछ खास चीज़ें ही खाते हों या आपके डॉक्टर ने उन्हें सप्लीमेंट देने के लिए कहा हो।