Does breastmilk take care of all my infants nutrition needs

क्या माँ का दूध नवजात शिशु के पोषण से जुड़ी हर ज़रूरत को पूरा करता है?

माँ बनना आपके जीवन में कई खूबसूरत अहसास के साथ-साथ थोड़ी बहुत चिंताएं भी लेकर आता है। पहली बार माँ बनने वाली महिलाओं के मन में शिशु को जन्म देने के बाद अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या माँ का दूध शिशु की पोषण से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी होता है?

अब तक तो आप समझ ही गए होंगे कि आपके बच्चे को सामान्य विकास और वृद्धि के लिए संतुलित मात्रा में आहार और पोषण मिलना कितना ज़रूरी है। इसलिए मन में ये सवाल उठना कि क्या शुरूआती 6 महीनों में माँ का दूध आपके बच्चे के लिए काफ़ी होगा, बड़ा ही स्वाभाविक है और इसलिए आपके लिए यह जानना बहुत ज़रूरी है कि माँ के दूध के पोषण संबंधी फ़ायदे क्या हैं और यह किस तरह से एक शिशु के पोषण से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफी है।

सिर्फ़ कोलोस्ट्रम:

दूध से पहले निकलने वाला पीला पदार्थ, जो शिशु को पहले 5 दिन पिलाया जाता है, कई तरह के फ़ायदे देता है। यह शिशु में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, पीलिया से बचाता है और शिशु के पहले मल को आसानी से त्यागने में उसकी मदद करता है। इसको पचाने की क्षमता और पोषण दोनों ही नवजात शिशु के लिए एकदम सही और फ़ायदेमंद है। आपका शिशु अपने जीवन के पहले पाँच दिनों में सिर्फ़ कोलोस्ट्रम पर ही निर्भर रहता है। आपको यह सोचकर हैरानी हो रही होगी कि कैसे इतना थोड़ा सा पदार्थ मेरे बच्चे की भूख मिटाने और सभी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी है। वैसे परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इस समय आपके शिशु के पोषण से जुड़ी ज़रूरतों को इससे बेहतर कोई और पूरा नहीं कर सकता है!

सही प्रोटीन:

माँ का दूध व्हे और कैसीन नामक दो प्रोटीन से बना होता है। इसमें व्हे और कैसीन का अनुपात 60:40 का होता है, जोकि आपके बच्चे के अच्छे पाचन के लिए एकदम सही है। इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि आपके बच्चे का पाचन तंत्र अभी भी विकसित हो रहा है और उसे आसानी से पचने वाले आहार की ज़रुरत है। इसलिए माँ का दूध शिशु के पेट के लिए एकदम सही है।

फैट अच्छा है:

माँ के दूध में पाया जाने वाला फैट शिशु की कैलोरी की ज़रूरतों को भी पूरा करता है। यहाँ तक की माँ के दूध से मिलने वाले फैट-सॉल्युबल विटामिन ए, डी, ई और के शरीर में आसानी से अवशोषित कर लिए जाते हैं। माँ का दूध ख़ास लंबी फैटी एसिड की चेन से भरपूर होता है जो शिशु की आँखों, दिमाग और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए ज़रूरी है।

ज़रूरी कार्बोहाइड्रेट मिलना:

लैक्टोज़ एक अहम् कार्बोहाइड्रेट है जिससे स्तनपान करने वाले शिशु के लिए ज़रूरी कैलोरी का 40% मिलता है। फैट की तरह कार्बोहाइड्रेट भी शरीर में कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम जैसे कुछ ख़ास पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। साथ ही, लैक्टोस पेट में अच्छे बैक्टीरिया के विकास में मदद करता है और नुकसानदायक बैक्टीरिया को बढ़ने से रोकता है।

तरह-तरह के विटामिन:

माँ का दूध मनुष्य के शरीर के लिए ज़रूरी सभी विटामिन का भंडार है। हर विटामिन शरीर के लिए ख़ास काम करता है और उतनी ही मात्रा में मौजूद होता है जितना एक शिशु के शरीर में उसके पहले 6 महीनों के लिए ज़रूरी है। हालाँकि माँ के दूध में पाए जाने वाले विटामिन की मात्रा, उनकी डाइट पर निर्भर करती है, और इसलिए माँ को अपनी रोज़ाना की डाइट में पर्याप्त मात्रा में विटामिन शामिल करने चाहिए। इसी कारण कई बार विटामिन की कमी होने पर माँ को सप्लीमेंट लेने की सलाह दी जाती है।

और सिर्फ़ यही नहीं! स्तनपान के और भी कई फ़ायदे हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए।

  • जो शिशु स्तनपान पर होते हैं, उनमें एलर्जी, एक्ज़िमा, साँस से जुड़ी बीमारियाँ, क्रोन रोग, कोलाइटिस, टाइप 1 डायबिटीज़, बोलने और हड्डी से जुड़ी समस्याएँ और कैविटी होने की संभावना कम होती है।
  • उसी तरह, बड़े होने पर किशोरों और युवा लोगों में भी दिल से जुड़ी समस्याएं, गठिया, ल्यूपस और मल्टीपल स्क्लेरोसिस के साथ-साथ ब्रैस्ट कैंसर होने की संभावना भी कम होती है।

स्तनपान के कई फ़ायदे हैं। माँ के दूध में:

  • आदर्श गाढ़ापन होता है जो आपके शिशु के दूध निगलने की क्षमता के मुताबिक होती है
  • पोषक तत्वों की सही मात्रा होती है जो आपके शिशु की पाचन क्षमता के अनुकूल होती है
  • बच्चे द्वारा अवशोषण और इस्तेमाल करने की क्षमता के अनुकूल सही पोषक संरचना होती है
  • आपके बच्चे के शरीर के तापमान से मेल खाता तापमान होता है
  • आपके बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने के लिए सही एंटीबॉडीज़ होती हैं
  • जब भी आपका शिशु भूखा होता है तो माँ के शरीर में सही मात्रा में दूध बनता है

हाँ! आखिरी बात आपकी सबसे बड़ी शंका का उत्तर है! स्तनपान सिर्फ इसलिए ज़रूरी नहीं है क्योंकि इसमें आपके बच्चे की ज़रूरत के अनुसार पोषक तत्व पाए जाते हैं बल्कि यह उतनी मात्रा में बनता है जितनी की शिशु को ज़रुरत होती है। साथ ही यह तभी बनता है जब शिशु को दूध पिलाने का वक्त होता है।

याद रखें कि सिर्फ़ कुछ ख़ास परिस्थितियों (जैसे सी- सेक्शन, कैंसर, आदि ) या फिर बच्चे में अगर स्वास्थ से जुड़ी कोई परेशानी हो (जैसे कटा हुआ होंठ, पीलिया, आदि), तो माँ के दूध के साथ-साथ कुछ सप्लीमेंट्री फ़ूड आइटम देना भी ज़रूरी होगा।