Breast Milk Protein and allergy

क्या आपके शिशु को ब्रेस्टमिल्क से एलर्जी है आपके जानने लायक सभी ज़रूरी बातें

हम सभी जानते हैं कि नवजात शिशुओं के लिए ब्रेस्टमिल्क यानी माँ का दूध ही पहला और संपूर्ण आहार है। यह शिशु के विकास के लिए भी बहुत ज़रूरी है। कई बार शिशुओं को ब्रेस्टमिल्क से एलर्जी नहीं होती बल्कि उस प्रोटीन से एलर्जी हो सकती है जिन्हें शायद उनकी माताओं ने अपनी नियमित डाइट में शामिल करके खाया हो। शिशु को होने वाली एलर्जी कितनी और कैसी है यह शिशु की प्रोटीन पचाने की शक्ति और माँ ने कितना प्रोटीन खाया है इस पर निर्भर करता है। इस तरह की एलर्जी के लक्षण स्तनपान के तुरंत बाद या 4 से 24 घंटे के अंदर नज़र आ सकते हैं।

ऐसा क्यों होता है?

जो प्रोटीन एलर्जी का कारण बनता है, उसे आमतौर पर माँ अपनी डाइट के ज़रिए खाती है और फिर यह ब्रेस्टमिल्क से शिशु के शरीर में पहुँचता है। हो सकता है कि यह प्रोटीन माँ को किसी तरह का नुकसान ना पहुँचाए, लेकिन शिशु को इससे एलर्जी हो सकती है। जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी की संभावना सबसे ज़्यादा होती है उनमें डेयरी प्रॉडक्ट, गेहूं, मक्का, अंडे, सोया और मूंगफली शामिल हैं। अगर परिवार में किसी दूसरे सदस्य को भी इन चीज़ों से एलर्जी हो, तो शिशु में एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शिशु में भी अपने परिवार के सदस्यों के लक्षण आते हैं।

माँ की डाइट में शामिल गाय के दूध का प्रोटीन अक्सर ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी के लक्षण पैदा कर सकता है। ये लक्षण हैं:

  • बिना किसी ख़ास कारण के शिशु को उल्टी दस्त होना।
  • शिशु के मल त्यागने की जगह पर लालपन आ जाना क्योंकि इस समय शिशु का मल ज़्यादा एसिडिक (अम्लीय) हो जाता है। इस समय आपके शिशु को नैपी रैश (पिछले हिस्से में दाने) भी हो सकता है।
  • ब्रेस्टमिल्क के प्रोटीन की एलर्जी के कारण शिशु का पेट फूल सकता है।
  • शिशु का चिड़चिड़ापन और लगातार रोना।
  • शिशु ठीक से नहीं सो पाता और अचानक उठ जाता है।
  • शिशु की त्वचा पर एग्जिमा और पित्ती जैसे दाने हो जाते हैं। यह एलर्जी का सामान्य और सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला लक्षण है।
  • शिशु के मल का रंग बदल जाता है और यह ज़्यादा पतली या मोटी भी हो सकती है। कुछ मामलों में शिशु के मल से खून भी आ सकता है।
  • कभी-कभी इस एलर्जी के कारण शिशु को सांस लेने में तकलीफ़ होती है जिससे शिशु की सांस में घरघराहट की आवाज़ आती है और उन्हें खांसी भी हो सकती है।
  • आपके शिशु को पेट की तकलीफ़ और दर्द भी हो सकता है।

ब्रेस्टमिल्क एलर्जी के पीछे के वैज्ञानिक कारण

ब्रेस्टमिल्क शिशु को आसानी से पचता है क्योंकि इसमें सारे पोषक तत्व अपने सरल रूपों में होते हैं। हालांकि कुछ शिशुओं में लैक्टेज़ नामक एंजाइम की कमी होती है जो लेक्टोज़ और गैलेक्टोज़ को आसान शर्करा (शुगर) में तोड़ने का काम करता है। ये शिशु आमतौर पर गैलेक्टोसिमिया नाम की स्थिति के साथ पैदा होते हैं और जब वे ब्रेस्टमिल्क या जानवर का दूध पीते हैं, तो दस्त और उल्टी जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं।

कुछ शिशुओं में ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है और इसलिए शिशुओं में इस तरह की एलर्जी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। कई शिशुओं में ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी उम्र के साथ-साथ ठीक हो जाती है लेकिन फिर भी आपको सावधान रहने की ज़रूरत है।

एक माँ के तौर पर आपको क्या करना चाहिए

अगर आपको अपने शिशु में ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी के लक्षण दिखाई देते हैं तो आपको दूध और दूसरे डेयरी प्रॉडक्ट (क्रीम, दही, मक्खन, आइसक्रीम आदि) का सेवन करना बंद कर देना चाहिए। आप इन्हें कुछ महीने बाद फिर से अपनी डाइट में शामिल कर सकती हैं।

अगर आपके परिवार में एलर्जी की हिस्ट्री है, तो गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान आपको डेयरी प्रॉडक्ट, मूंगफली, अंडे, मछली और दूसरे नट्स कम मात्रा में खाने चाहिए। हालाँकि आप डेयरी प्रॉडक्ट की जगह सोया मिल्क ले सकती हैं। जब आपका शिशु 6 महीने का हो जाए तो उसे स्किन टेस्ट के लिए डॉक्टर के पास ले जा कर सोया प्रोटीन एलर्जी के लिए उसका स्किन टेस्ट करवा सकती हैं। अगर उसे इससे एलर्जी नहीं है तो आप धीरे- धीरे उसकी डाइट में सोया मिल्क शामिल कर सकती हैं।

याद रखिए की शिशुओं को सभी खाद्य पदार्थों से एलर्जी नहीं होती है। कुछ खाने की चीज़ों से शिशुओं को थोड़ी तकलीफ़ हो सकती है पर उनमें एलर्जी के कोई लक्षण नहीं दिखते हैं। कई बार जब माँ ज़्यादा मसालेदार खाना या कोई ऐसा खाना खा लेती है जिससे गैस बनती हो, तब शिशु स्तनपान के दौरान या उसके बाद रोने लगता है। ऐसा खाना खाने के बाद एलर्जी के लक्षण बहुत कम होते हैं और 24 घंटों के बाद यह खत्म भी हो जाते हैं। ऐसे समय आपको कुछ दिनों के लिए इन खाने की चीज़ों से परहेज करना चाहिए और शिशु में इसका असर देखना चाहिए। अगर यह लक्षण शिशु में लंबे समय तक रहें तो यह शिशु में कॉलिक (पेटदर्द ) के लक्षण भी हो सकते हैं। आपके बच्चों के डॉक्टर आपके खान-पान में बदलाव करके इन लक्षणों को खत्म करने में आपकी मदद कर सकते हैं।

कुछ आख़िरी शब्द

भारत में ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी बहुत से माता-पिता के लिए एक चिंता का विषय है लेकिन विशेषज्ञ गलत निदान और नॉन -एलर्जेनिक फॉर्मूला के नासमझी भरे इस्तेमाल से सावधान रहने की सलाह देते हैं। आम धारणा के विपरीत, ब्रेस्टमिल्क एलर्जेनिक नहीं है और आपको अपने बच्चे को स्तनपान करवाना चाहिए। अगर शिशु में ब्रेस्टमिल्क की एलर्जी के लक्षण दिखते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से उसके कारणों के बारे में बात करनी चाहिए और अपने शिशु को ब्रेस्टमिल्क के प्रोटीन की एलर्जी से बचाने के लिए सलाह लेनी चाहिए।