Is Your Baby Lactose Intolerant_ Here’s How You Can Tell

क्या आपका बच्चा लैक्टोस इन्टॉलरेंट है? जानें, आप ये कैसे पता कर सकते हैं

अब तक आप यह सोच रहे हैं कि दूध आपके बच्चे के लिए सबसे अच्छा आहार है। लेकिन अगर आपका बच्चा दूध को ही न हज़म कर पाए तो? यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि आपके बच्चे में लैक्टोस इनटॉलेरेंस (लैक्टोस असहिष्णुता) है या दूध से एलर्जी है। नीचे लैक्टोस इनटॉलेरेंस के बारे में कुछ ज़रूरी बातें दी गई हैं जिन्हें जानकर आपके सभी शक दूर हो जाएंगे:

छोटे बच्चों में लैक्टोस इनटॉलेरेंस और दूध से एलर्जी का मतलब अलग-अलग है, हालांकि दोनों एक जैसे ही हैं। लैक्टोस इनटॉलेरेंस, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सिस्टम (पाचनतंत्र) को प्रभावित करता है लेकिन दूध से एलर्जी आपके बच्चे की रोग प्रतिरोधक शक्ति को कम करती है। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है लैक्टोस इनटॉलेरेंस की समस्या बढ़ने लगती है, लेकिन दूध से एलर्जी बच्चे के एक साल का होने से पहले ही हो सकती है।

लैक्टोस इनटॉलेरेंस होने की वजह

लैक्टोस इनटॉलेरेंस किसी को भी हो सकता है। नवजात शिशु, छोटे बच्चे, स्कूल जाने वाले बच्चे, किशोर और यहां तक कि बड़ी उम्र के लोगों को भी यह समस्या हो सकती है। यह आपके शरीर में लैक्टोस को ना पचा पाने की वजह से होता है। लैक्टोस एक प्रकार की चीनी है जो दूध और दूध से बनी चीज़ों के साथ-साथ माँ के दूध में पाई जाती है। इसलिए, जो बच्चे सिर्फ माँ का दूध ही पीते हैं, उन्हें भी लैक्टोस इनटॉलेरेंस की समस्या हो सकती है।

लैक्टोस को पचाने के लिए, शरीर को लैक्टेज नामक एक एंजाइम की ज़रूरत होती है। यह एंजाइम आमतौर पर आंतों में पाया जाता है। शरीर में लैक्टोस की ज़रूरी मात्रा न बनने की वजह से हमारा पाचन तंत्र इसे पचा नहीं पाता है और इसलिए इस शुगर के लिए इनटॉलेरेंस बढ़ जाता है।

लैक्टोस इनटॉलेरेंस के लक्षण

इससे पहले कि बच्चों में लैक्टोस इनटॉलेरेंस के इलाज के बारे में बात करें, आपको इसके लक्षण पता होने चाहिए। ज़्यादातर बच्चों में दूध पीने के आधे घंटे से लेकर दो घंटे के अंदर ही इसके लक्षण दिख जाते हैं। दिखाई दिए लक्षणों की गंभीरता एक बच्चे से दूसरे बच्चे में अलग-अलग हो सकती है और ये लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कितना और कौन सा लैक्टोस लिया गया है। इसके मुख्य लक्षण नीचे दिए गए हैं:

  • जी मिचलाना

  • पेट में दर्द

  • चिड़चिड़ापन

  • गैगिंग (बोलने में परेशानी)

  • बुरी तरह रोना और पॉटी करते समय गैस छोड़ना

  • पानी और झाग वाले दस्त लगना

  • त्वचा पर चकत्ते पड़ना (स्किन रैशेज़ )

बच्चों में लैक्टोस इनटॉलेरेंस का इलाज

लैक्टोस इनटॉलेरेंस के इलाज के लिए पहला कदम यह समझना है कि बच्चा इसे किस हद तक सहन कर सकता है। इसके बाद, एक बाल रोग विशेषज्ञ की मदद से एक मां, अपने बच्चे के लिए लैक्टोस इनटॉलेरेंस आहार चुन सकती है। बच्चे के 6 महीने का होने पर उसे लैक्टोस फ्री दूध पिलाया जा सकता है, जिसमे लैक्टोस फ्री फॉर्मूला, बादाम दूध और सोया दूध शामिल हैं। बच्चों के डॉक्टर से संपर्क करें, पूरी जाँच और सलाह के बाद ही बच्चे को एक सही लैक्टोस फ्री दूध दिया जाना चाहिए।

क्योंकि, आपका बच्चा बहुत ज़्यादा दूध नहीं पी सकता है, इसलिए उसके भोजन में अन्य खाने की चीज़ों को शामिल करना ज़रूरी है, जिसमें दूध में पाए जाने वाले सभी पोषक तत्व हों। आमतौर पर दूध में पाए जाने वाले ज़रूरी कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों को प्राप्त करने के लिए, आप अपने बच्चे को सोया से बनी चीज़ें, हरी पत्तेदार सब्जियां, अंडे, फल, मुर्गी, मछली और मांस खिला सकते हैं। इसके अलावा, आप अपने बच्चे को फोर्टिफाइड जूस और खाना भी दे सकते हैं।